Monday, 10 October 2011

बस इतना सा उपकार कर देना

अपनी सारी खुशियंा बांट देना उन्हे,
जिन्हे तुम चाहो
मेरे लिये,
बस गमों को छोड़ देना ।
याचक बनकर आउंगा,
तुम्हारी दहलीज पर।
तुम अपने गमों से,
मेरी खुशियों की झोली भर देना।
मैं अपनी दुआओं में अपनी हंसी,
तुम्हे अर्पण कर दूंगा।

बस इतना सा उपकार कर देना ।


अपनी मांग में सिंदूर,तुम बेशक सजा लेना,
किसी और के नाम का
मुझे बस बिछुआ के नाम पर,
पैरों में जगह  दे देना।
मैं तुम्हारी राह के कांटों को,
अपने सीने में सहन कर,
बस फूल-कलियां तुम्हे अर्पण कर दूंगा।

बस इतना सा उपकार कर देना ।



अपनी बहारों में शामिल कर लेना,
बेशक तुम किसी और को
मेरे लिये बस पतझड़ का मौसम छोड़ देना,
जब सारे फूल-पत्ते साथ छोड़ दें,
तब मुझे याद करना,
मैं आकर अपना बसंत तुम्हे अर्पण कर दूंगा।

बस इतना सा उपकार कर देना ।

19 comments:

  1. अपन बहारें में शामिल कर लेना,
    बेशक तुम किसी और को।
    मेरे लिये बस पतझड़ का मौसम छोड़ देना,
    जब सारे फूल-पत्ते साथ छोड़ दें,
    तब मुझे याद करना।
    मैं आकर अपना बसंत तुम्हे अर्पण कर दूंगा।

    बस इतना सा उपकार कर देना ।

    bahutt hee khoobsurat gazal hai hari bhai....

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  2. बेहद खूबसूरत गजल है सर!

    ------
    कल 12/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. एक निवेदन
    कृपया निम्नानुसार कमेंट बॉक्स मे से वर्ड वैरिफिकेशन को हटा लें।
    Login-Dashboard-settings-comments-show word verification (NO)

    अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्न वीडियो देखें-
    http://www.youtube.com/watch?v=L0nCfXRY5dk

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  4. बहुत अच्छी रचना है आपकी...मेरी बधाई स्वीकारें...

    नीरज

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  5. खूबसूरत भाव से सजी अच्छी रचना ...

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  6. आपकी मेल से आपके ब्लॉग पर आया हूँ.
    अच्छा लगा आपकी भावपूर्ण प्रस्तुति पढकर.
    खुबसुरत समर्पण के भाव मन को छूते हैं.

    सुन्दर प्रस्तुति नके लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.

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  7. इतना सा नहीं बहुत बडा काम है ये तो


    वर्ड वेरीफ़िकेशन हटा दो, उसकी जगह माडरेशन लगा दो,

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  8. अपन बहारें में शामिल कर लेना,
    बेशक तुम किसी और को।
    मेरे लिये बस पतझड़ का मौसम छोड़ देना,
    जब सारे फूल-पत्ते साथ छोड़ दें,
    तब मुझे याद करना।
    मैं आकर अपना बसंत तुम्हे अर्पण कर दूंगा।

    बस इतना सा उपकार कर देना ।
    सुन्दर भावों को समेटे एक खूबसूरत रचना |

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  9. शब्द पुष्टिकरण हटा दें तो टिप्पणी करने में आसानी होगी ..धन्यवाद
    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो NO करें ..सेव करें ..बस हो गया

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  10. bahut pyari si gajal hai....maine follow bhi kiya!
    kabhi hamare blog pe aana!

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  11. वाह ...बहुत अच्‍छा लिखा है ... ।

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  12. बहुत अच्छी रचना है आपकी..

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  13. atal ji , very beautifully you expressed the true love.
    really true love is name of giving happiniess to our dear ones without expectation..
    very hraet touching lyrics..

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  14. तुम अपने गमों से,
    मेरी खुशियों की झोली भर देना।
    बहुत सुन्दर भाव....
    सुन्दर कविता.... सादर बधाई....

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  15. bahut sundar...

    mere blog pe aapka swagat hai...

    meri-mahfil.blogspot.com

    mymaahi.blogspot.com

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  16. समर्पण की सीमाओं को छूती ... लाजवाब अभिव्यक्ति है ...

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  17. दीवाली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  18. Aapko aur apke parivar ko diwali ki subhkamnye


    :- Hari Attal

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